कैसे आयगी भारतीयों के मन मे स्वच्छता।

आज हर तरफ स्वच्छता की बात हो रही है. अच्छा है देश को साफ सुथरा होना ही चाहिए. लेकिन सवाल यह है कि लोग सब्सिडी की लालच में तो पूरा प्रशासनिक अमला फैला रिकॉर्ड, सम्मान या फिर दबाव के चलते इस योजना को सफल बनाने के लिए जी जान से लगा है. इसकी असल तस्वीर तो कुछ समय बाद आएगी. सवाल ये है कि क्या हम शौचालय के लिए दो फुट गढ़ा खोद कर अपनी संपूर्ण इज्जत पे पर्दा डाल सकते हैं वो भी सरकार के सब्सिडी की लालच में? बिल्कुल नहीं. पहले बनाए जा चुके शौचालयों की तस्वीर आपको समय समय पे अख़बारों में देखने को मिल जाएंगी कि उनकी आज क्या हालत है.

हम जाति/धर्म के नाम पे तो लड़ रहे हैं लेकिन धर्मों के उसूलों से कोसों दूर हैं. #इस्लाम में सफाई #आधा_ईमान कहा गया है. मुझे नहीं लगता कि दुनिया का कोई धर्म आपको गंदा रहने को कहता है. लगे हाथ सरकार को भी चाहिए कि जातिवार सूची उपलब्ध कराए कि कितने लोगों के पास पहले से शौचालय हैं और कितनों को इसके लिए सब्सिडी दी गई.

#योग_दर्शन के अष्टांग योग के नियम के अन्तर्गत #शौच अर्थात संपूर्ण जिसमें आंतरिक और बाह्य सफाई शामिल है की ताकीद की गई है. अफसोस इस बात का है कि अब तक हुए चार विश्व योग दिवस के मौके पर किसी जिले के जिलाधिकारी महोदय ने शहर के पार्क में जा कर आसन प्राणायाम या योग सिद्धांत की बात कर लोगों को जागरूक करने का काम किया हो. लेकिन रिकॉर्ड और सम्मान के लिए प्रति घंटा अधिक से अधिक गढ़ा खोदने की प्रतियोगिता चल पड़ी है. लाखों करोड़ों बजट के वारे न्यारे हो रहे हैं.

लोगों को चाहिए कि शौचालय के लिए मिलने वाले इन सब्सिडियों के अलावा इन अधिकारियों से अपनी असुरक्षा, रेप, भूख, घुस, बेरोजगारी, गरीबी, मंहगाई, दहेज हत्या, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, लिंचिंग आदि से निदान सुनिश्चित करने की मांग करें इनका घेराव हो. सोच बदले बिना भारत को शौच मुक्त तो नहीं किया जा सकता अलबत्ता गिनीज बुक में शौचालय निर्माण के लिए प्रति घंटा अधिक गढ़ा खोदने का विश्व रिकॉर्ड बनाया जा सकता है. मुझे तो गिनीज बुक में दर्ज हो रहे इन रिकॉर्ड और भारतीय रुपयों पे अंकित सफाई वाले स्लोगन से अंतरराष्ट्रीय_शर्मिंदगी महसूस होती है. शायद आपको नहीं होती होगी….!!!

Blog by Shaikh khalid

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