मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना की सच्चाई क्या है, पढ़े ग्राउंड रिपोर्ट।

मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत ये बच्चे पटना पधारे हैं लेकिन अफसोस कि ठेले पे खाये और फुटपाथ पे सोए ये बच्चे खुद ही #दर्शन के लायक हो गए हैं. ये बच्चे उसी चंपारण के है जहां गांधी सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर खुशी मनाई जा रही है.
सबसे गूढ़ सवाल ये है कि इस योजना के तहत मिलने वाली राशि बिहार के दूर दराज से बस से बच्चों को पटना या फिर दूर के किसी एतिहासिक जगह पे भ्रमण के लिए क्या काफी है? हकीकत तो ये भी है कि मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना की राशि का आधा रकम जिला के शिक्षा विभाग के बाबुओं को खुश करने में निकल जाता है शेष राशि शिक्षक, ड्राईवर और बस मालिक तक कमिश्न के रूप में बंटनी होती है. ऐसे में भ्रमण की क्या गुणवत्ता होगी ये बस अंदाज़ा लगाइए. बच्चे क्या खाएंगे? कहां और कैसे ठहरेंगे? सबसे खराब हालत तो बस के अंदर होती है जब क्षमता से अधिक बच्चे बस में ठूंस कर ले जाये जाते हैं जिसमें 5% प्रतिशत बच्चे तो एक दूसरे के उपर उल्टी/ दस्त करते जाते हैं.
अतः आग्रह है कि इन सारी कमियों को दूर किया जाए नहीं तो दर्शन योजना का कबाड़ा होते देर नहीं लगेगी.

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