इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखने पर रेलवे स्टेशन पर खड़ी सभी ट्रेन बुलेट ट्रेन बन गई???

आज कल नाम बदलने का दौर चल रहा है, कुछ जगहों के नाम बदल दिए गए हैं जैसे अलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया है तो शिमला का नाम बदल कर श्यामला रखने की बात चल रही है, लेकिन सवाल ये उठता है कि नाम बदलने से आखिर मिलेगा क्या?

कुछ राजनीतिक जानकारों के अनुसार नाम बदलने से वोटों का धुर्वीकरण किया जा रहा है, लोगों को ये अहसास दिलाया जा रहा है कि सरकार कुछ काम कर रही है।

जैसे रुपया का नाम डॉलर रख देने से रुपए की कीमत नहीं बढ़ेगी वैसे ही किसी जगह का नाम बदल देने से इस जगह का कोई विकास नहीं होने वाला है।

लेकिन नाम बदलने में जो पैसा खर्च होगा वो जनता का ही दिया होगा टैक्स होगा क्योंकि जब किसी जगह का नाम बदला जाता है तो वहां के हर एक बोर्ड पर नाम बदलना पड़ता है यहां तक की हर एक सरकारी पेपर नए छपवाने पढ़ते हैं जिस में करोड़ों का खर्च आता है और यह सारा खर्चा आपके दिए हुए टैक्स में से ही किया जाता है।
इसीलिए हम तो यही कहेंगे नाम में क्या रखा है।
इलाहाबाद का नाम प्रयागराज रखने से अब वहां के रेलवे स्टेशन पर बुलेट ट्रेन नहीं चलने लगी बल्कि सब कुछ पहले जैसा ही होगा यह लोगों को समझने की जरूरत है

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